सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

ग़ज़ल दिल किसी का दुखाया


ग़ज़ल  दिल किसी का दुखाया

मैंने दिल किसी का दुखाया
मैने दिल किसी का दुखाया।
नादान था बहुत ही नटखट
नादानगी में उनको बहुत सताया।।

जिसने झुलाया था हमें
अपनी बाहों की झुलों मे।
जो बनके घोड़ा बिठाकर पीठ पर अपने
इंसा कोई हँसाया करते थे हमें।।

हर पल हँसाया था जिसने हमें
उसे हमने बहुत रूलाया।
नादानगी में मदहोश किशन
दिल किसी का दुखाया।।

रूठ जाता था कभी तो मा मुझे मनाती
बिठाकर गोद मे हमे खूब हँसती खिलखिलाती
रोता था जब कभी भी सुनाकर लोरियाँ
अपने आँचल तले हमे सुलाती।।

जो हँसाती थी हर पल मुझे
उसको हमने बहुत रूलाया
नादान ही तो था किशन
मैने दिल किसी का दुखाया।।

लेखक- किशन नादान

2 टिप्‍पणियां:

Santosh ने कहा…

Naadan jee bahut hi bhawnatmak ghazal hai.

Dayakant ने कहा…

Kishan jee aapke naam ke sath nadan nahi "Mahan" jurna chahiye Bahut hi marmdayak, bhawnatmak gajal laga aapka. mai esswar se kamna karunga ki aap aise hi apni lekhni ke bal par ek din "Shakespear" ke jagah lenge. Dhanybad.